जानिए किन लोगों के लिए माफ़ है रोज़ा रखना, कौन-कौन है इसमें शामिल ..?

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    इल’म ध’म की मस्जिद में पांच पिलर पर है और वह पांच पिलर यह हैं, कलमा (अ’ललाह को एक विश्वास), न’मज़, ज़कात (दान), रोज़ा और हे (म्क में काबा )। रो’ज़ा भी इ’लम के इस पाँच पिलर में से एक है जो हर बा’लिग़ांव पर वा’जिब यानी कम्प्लसरी है और उन्हें पूरे महीने के रोज़े रखने पड़ते हैं।, अगर कोई बीमार हैं, जो यात्रा पर हैं, नहीं महिलाएं प्रे’ग्नेंट हैं, छोटे बच्चे हैं, बस उन्हें ही रोज़ा नहीं रखने से छूट दी गई है। दैनिका रखने वाले खाने पीने के अलावा सिगरेट, बीड़ी का स्मं भी नहीं ले। कर सकते हैं रोज़ा रखने वाले मुँह का थूक भी नहीं झुका सकता है। अगर खाने की कोई चीज देखकर मुंह में पानी आ गया तो वह भी निश्शेद हो गया। महीने में मुलिम किसी से ज’किंग से, चुगली करने और गुस्सा करने से प्याज़ पड़ते हैं। पूरी तरह से महिना पूरी तरह से खुद को संयम में रखने का महीना है और केवल रोज़ा रखने वाले का रोज़ा पूरा होता है।हर घर में खाने पकाने की व्यवस्थाजाम सवेरे से ही होने लगते हैं और तरह तरह के लज़ीज़ खाने वाले घर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। हैं। शाम को रोज़ा खोलने के वक्त अगर द’स्त’खवा’न देखा जाए तो हर एक का दिल ललचा सकता है।सुबह तड़के के जब में खाते हैं तो उसे ‘सहारी’ और जब शाम को बच जाती है तो उसे प्यार ” कहते हैं। इस तरह से ये पूरे महीने का त्योहार भी है।

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