मध्य प्रदेश में रातों-रात ‘चोरी’ हुई 1 किमी सड़क, ग्रामीणों ने पुलिस और पंचायत से की शिकायत

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मध्य प्रदेश हमेशा से ही भ्रष्टाचार का गढ़ रहा है। जहां भ्रष्टाचार के विचित्र मामले दर्ज किए गए है। जिन पर विश्वास करना भी संभव नहीं हो पाता है। अब ऐसा ही एक नया मामला सामने आया है। जो सड़क चोरी से जुड़ा है। जिसकी अब पुलिस जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, राज्य के सीधी जिले के एक सुदूर गांव में रातों-रात एक किमी सड़क गायब हो गई है। जिसके बाद गांव के उप सरपंच व स्थानीय लोगों ने स्थानीय थाना (मंझोली) में पहुंचकर सड़क के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। सड़क के गायब होने की खबर चर्चा का विषय बनी हुई है।

उन्होंने पुलिस को बताया कि वे एक ऐसी जगह की बात कर रहे हैं जहां रात में एक सड़क थी लेकिन अगली सुबह गायब थी। मामला जनपद पंचायत कार्यालय तक भी पहुंचा जहां अधिकारी भी चकरा गए। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने स्वीकार किया कि उनके कार्यालय को सड़क गायब होने की सूचना मिली है।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि दरअसल गांव में कागजों पर एक संपर्क सड़क बनाई गई थी और परियोजना के लिए धन का कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों द्वारा गबन किया गया। हालांकि, हाल ही में मानसून ने इस क्षेत्र में दस्तक दी थी, जिससे पहुंच मार्ग कीचड़ में बदल गया।

वहीं पंचायत के अभिलेखों में भी यह दर्ज पाया गया कि उक्त मार्ग पर वर्ष 2017 में एक कच्ची सड़क (कुचल पत्थरों के साथ) थी और छह महीने बाद, 10 लाख रुपये के बजट से एक पक्की सड़क बनाई गई। अभिलेखों के खुलासे के बाद निर्माण एजेंसी ने मामले को दबाने की भी की कोशिश की। इसके लिए रात में सड़क निर्माण की कुछ सामग्री सड़क परडाल दी, लेकिन कुछ दिन पहले हुई भारी बारिश में वह बह गई।

उप सरपंच रमेश कुमार यादव ने भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले तक वार्ड संख्या 15 में रात में सड़क अच्छी स्थिति में थी लेकिन सुबह ‘चोरी’ हो गई और वहां रखे कुचल पत्थर भी गायब हो गए। ग्रामीण मंझोली जनपद पंचायत कार्यालय भी पहुंचे और ‘चोरी’ सड़क की शिकायत दर्ज कराई।

जनपद पंचायत मंझोली के सीईओ एमएल प्रजापति ने कहा कि स्थानीय लोगों ने उनसे शिकायत की थी कि कुछ दिन पहले रात में एक सड़क चोरी हो गई और वह मामले की जांच कराएंगे। हालांकि स्थानीय भाजपा नेता अखिलेश पांडे ने दावा किया कि स्थानीय लोगों का दावा है कि सड़क के लिए बनाया गया बजट सरकारी कर्मचारियों द्वारा ले लिया गया था लेकिन उनके क्षेत्र में कोई सड़क नहीं बनी।

पांडे ने कहा कि मैं इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से करवाऊंगा। जनपद पंचायत के कई अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि इस मामले में भ्रष्टाचार हुआ है क्योंकि सड़क कभी नहीं बनी।

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