कलकत्ता हाईकोर्ट के जज ने खुद को सुनवाई से किया अलग, ममता बनर्जी पर लगाया 5 लाख का रुपए क जुर्माना

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कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कौशिक चंदा ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव में उनकी हार को चुनौती दी गई थी। हालांकि उन्होने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया।

न्यायमूर्ति चंदा ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर उन्होंने मामले की सुनवाई जारी रखी होती तो उन्हें नहीं लगता कि हितों का कोई टकराव होता। न्यायाधीश ने बनर्जी की याचिका से हटते हुए कहा, “किसी राजनीतिक दल के साथ एक न्यायाधीश के पिछले जुड़ाव से पूर्वाग्रह की आशंका नहीं हो सकती है।”

दरअसल ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि नंदीग्राम से उनके सुवेंदु अधिकारी से 1,956 मतों से हारने में अनियमितता बरती गई है, जो 32 वर्षों में उनकी पहली चुनावी हार है। टीएमसी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार के पक्ष में परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद पुनर्मतगणना की मांग की थी, लेकिन चुनाव आयोग ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। उनके मामले की सुनवाई सिंगल जज बेंच जस्टिस चंदा द्वारा की जानी थी।

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने “पूर्वाग्रह की आशंका” का हवाला देते हुए याचिका को किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित करने के लिए कहा। पार्टी ने कहा कि न्यायमूर्ति चंदा ने 2019 में पीठ में अपनी पदोन्नति से पहले, अदालती मामलों में भाजपा और उसके नेताओं का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हे बीजेपी के प्रदेश अध्यकाश दिलीप घोष सहित भाजपा नेताओं के साथ एक मंच साझा करने वाली तस्वीरों में देखा गया था।

न्यायमूर्ति चंदा ने बुधवार को अपने आदेश में कहा, “इस तरह के गणनात्मक, मनोवैज्ञानिक और आक्रामक प्रयासों को खारिज करने की आवश्यकता है और याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।” इस पैसे का इस्तेमाल को’विड-19 से लड़ने के लिए किया जाएगा।

ममता बनर्जी ने फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होने कहा, “यह एक विचाराधीन मामला है। मैं टिप्पणी नहीं करूंगा। वकील तय करेंगे कि जो भी निर्णय लेने की जरूरत है।”

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