टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े मानहानि मामले में सुधीर चौधरी की याचिका खारिज

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दिल्ली की एक अदालत ने ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी की उस याचिका को खारिज कर दिया है। जिसमे उन्होने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दायर एक कथित मानहानि मामले में उन्हें समन करने के आदेश को चुनौती दी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने सोमवार को आदेश पारित किया जिसमें कहा गया कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट का चौधरी को तलब करने का आदेश “अवैधता या विकृति से ग्रस्त नहीं था, और इसमें किसी भी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है और इस प्रकार पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज की जाती है।’’

अंतिल ने आगे कहा कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने एक विस्तृत आदेश पारित किया जिसमें शिकायतकर्ता और दो अन्य गवाहों के बयान के रूप में समन जारी करने के लिए आगे बढ़ने से पहले दस्तावेजों के साथ पूरे समन पूर्व साक्ष्य पर विचार किया गया और उनकी सराहना की गई।

बता दें कि सुधीर चौधरी ने अपने एक कार्यक्रम में आरोप लगाया था कि मोइत्रा द्वारा संसद में दिए गए भाषण को मार्टिन लॉन्गमीन द्वारा लिखे गए एक लेख से चुराया गया, जो वाशिंगटन मंथली नामक एक अमेरिकी वेबसाइट पर था। जिसके खिलाफ मोइत्रा ने चौधरी और उनके चैनल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में दिसंबर 2019 में एक मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने सुधीर चौधरी को आरोपी के रूप में तलब करने के आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ चौधरी ने सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि याचिका चौधरी द्वारा ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही को रोकने का एक प्रयास मात्र है। उन्होंने बताया कि कैसे निचली अदालत के समन आदेश से पहले ही याचिका दायर की गई। इसके अलावा, उन्होने यह भी कहा कि प्रसारण की मानहानिकारक प्रकृति प्रारंभिक चरण में अनुमान पर आधारित नहीं हो सकती है और इसे परीक्षण के माध्यम से तय किया जाना चाहिए।

चौधरी के वकीलों ने तर्क दिया कि उन्हें तलब करने से पहले, “जांच के परिणाम, ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किए गए सबूत और दस्तावेजी रिकॉर्ड का एमएम द्वारा आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए था।” उनके वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि “मजिस्ट्रेट ने कानून के प्रावधानों की सराहना किए बिना समन आदेश पारित करने में भी गलती की है”।

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