हरियाणा के सीएम ने कृषि कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को दी चेतावनी

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को मोदी सरकार द्वारा लाये गए तीन नए कानूनों का विरोध कर रहे किसानों से को चेतावनी देते हुए कहा कि वे सरकार के धैर्य की परीक्षा न लें। उनकी ये टिप्पणी गाजीपुर सीमा पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद सामने आई है।

खट्टर ने चंडीगढ़ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमने धैर्य बनाए रखा है लेकिन वे हमें धमकी देते रहते हैं कि मुख्यमंत्री नहीं जा सकते, उपमुख्यमंत्री गांवों का दौरा नहीं कर सकते।” उन्होने कहा, “सरकार चलाने वालों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों से मिलें और उनसे जुड़ें। कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे हमें कितना भड़काते हैं, हम शांत हैं क्योंकि वे हरियाणा के हमारे अपने लोग हैं। लेकिन यह किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा कि वह अपनी हदें पार कर जाए।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कृषि कानूनों का विरोध करने वाले राजनीतिक कारणों से ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “उनकी पंजाब टीम ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वहां चुनाव नजदीक हैं।” “लेकिन हमारे राज्य में कोई चुनाव नहीं हैं। यहां एजेंडा राजनीतिक एंगल का इस्तेमाल कर सरकार को बदनाम करना है और कांग्रेस भी इसमें उनका साथ दे रही है।”

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उन्होंने कहा कि पिछले महीने टिकरी सीमा पर पश्चिम बंगाल की एक महिला के कथित यौन शोषण जैसी घटनाओं से विरोध पर सवाल उठने लगे हैं। खट्टर ने कहा, “किसान [किसान] शब्द शुद्ध है और हर कोई उन्हें बहुत सम्मान देता है।” खट्टर ने कहा, “कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारण, किसान शब्द कलंकित हो गया है। बहनों-बेटियों की इज्जत छीनी जा रही है, हत्याएं हो रही हैं, सड़कें जाम की जा रही हैं। मैं उन घटनाओं की निंदा करता हूं जो अलोकतांत्रिक हैं।”

बता दें कि कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर नवंबर से अब तक हजारों किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाला हुआ है। कोरोनो महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर के बावजूद, किसान अब भी प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए है। पिछले कुछ महीनों में, उन्होंने हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी विरोध प्रदर्शन किया।

दरअसल, किसानों को डर है कि केंद्र सरकार के कानून उन्हें कॉर्पोरेट का गुलाम बना देंगे और उनको मिलने वाली न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था को खत्म कर देंगे। हालांकि, सरकार का दावा है कि तीनों कानून किसानों की भलाई के लिए हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के कार्यान्वयन को निलंबित कर दिया है। साथ ही एक समिति का गठन किया है। जो कानूनों के प्रभाव का आकलन करेगी।

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