11 साल बाद गुजरात की अदालत ने बेगुनाह कश्मीरी युवक को बाइज्जत किया रिहा

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श्रीनगर के रैनावाड़ी इलाके के रहने वाले बशीर अहमद बाबा को गुजरात की एक अदालत ने 11 साल से अधिक समय के बाद बेगुनाह पाये जाने पर बाइज्जत रिहा कर दिया। बशीर अहमद को कथित तौर पर हिजबुल मुजाहिदीन का सदस्य होने के आरोप में गुजरात में गिरफ्तार किया गया था।

गुलजार के भाई नजीर अहमद ने कहा कि उनके घर पहुंचने से खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि गुजरात में सत्र न्यायालय ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत बशीर को आरोपों से मुक्त कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश दिया।

गुजरात एटीएस ने बशीर अहमद बाबा को 2010 में हिरासत में लिया था। दरअसल, गुजरात में उन दिनों कैंसर मरीजों की देखभाल के लिए चार दिवसीय कैंप लगा था। जिसमे शामिल होने के लिए वह गुजरात आए थे और उन्हे गुजरात एटीएस ने हिरासत में ले लिया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस ए नाकाम ने कहा, “ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि वह इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के जरिए आतंकवादी तत्वों के संपर्क में था।” परिवार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी गुजरात पुलिस को बशीर की बेगुनाही के बारे में जानकारी दे दी थी। फिर भी उन्हे रिहा नहीं किया गया था।

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बशीर अहमद के हवाले से स्थानीय समाचार एजेंसी केएनटी ने बताया, “उन्होंने गुजरात जेल में बहुत कठिनाइयों और मानसिक प्रताड़ना का सामना किया। शुक्र है, बुरे दिन खत्म हो गए हैं।” उन्होंने 11 काले साल जेल में सिर्फ इसलिए बिताए क्योंकि वह एक संदिग्ध थे।

उन्होने बताया, वह एनजीओ माया फाउंडेशन से जुड़े किमाया क्लेफ्ट सेंटर में कैंप कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम कर रहे थे। उन्हें एनजीओ ने उनके काम से संबंधित 15 दिनों के प्रशिक्षण के लिए गुजरात में अपने एक केंद्र में भेजा था, जिसके लिए उन्होंने 17 फरवरी, 2010 को घर छोड़ दिया था। अगले महीने मार्च में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

बशीर पर आईपीसी की धारा 120 (बी) और 2010 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16, 17, 18, 20 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर  हिजबुल के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और अहमद शेरा के साथ फोन और ई-मेल के जरिए बातचीत के आरोप लगाए गए थे।

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