मंत्रिमंडल विस्तार पर बोले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज – ‘नौटंकी छोड़ जनता का जीवन सुधारे’

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम को अपनी केबिनेट का विस्तार किया। जिसमे 36 नए चेहरों को शामिल कर 43 नेताओं ( 43 Leaders) को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। पीएम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने की मिली है।

आलोचना करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस (रि.) मार्कंडेय काटजू भी है। उन्होने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मोदी कैब‍िनेट में क‍िया गया यह भारी बदलाव आम जनता के जीवन में कोई बदलाव ला सकेगा। मंत्रिमंडल में चेहरे बदल लेने से देश भर में व्यापत भयावह ग़रीबी, बेरोज़गारी, महंगाई, बाल कुपोषण, स्वास्थ सेवा और अच्छी शिक्षा का अभाव, किसानों का संकट, भ्रष्टाचार, दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जैसी समस्‍याएं मिट जाएंगी? उन्होने मंत्रिमंडल विस्तार को एक नौटंकी करार दिया।

कांग्रेस नेता अलका लांबा ने एक न्यूज़ चैनल पर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कहा कि, इंजन में ख़राबी हो तो डिब्बे नहीं बदले जाते। उन्होने कहा कि  “खराबी इंजन में है, जितने भी बदल लो डब्बे, वो रफ्तार नहीं पकड़ पाएंगे। और ये एक कप्तान की जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी विफलताओं का ठीकरा अपनी टीम के सिर मढ़कर एक नई टीम लेकर आ रहा है उससे कुछ बढ़िया होने नहीं वााला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को लिया गया, कि वरुण गांधी होंगे युवा सांसद हैं चुनकर आए हैं।”

वहीं वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, सरकार एक महीना पहले मंत्रालयों के ख़र्चे कम करने के लिए कह रही थी। उसी सरकार का झोला भर-भर कर मंत्रियों की संख्या 54 से 78 करने का तुक समझ नहीं आता है। उन्होने कहा, आने वाले पांच राज्यों में कितने राज्य मंत्रियों की ड्यूटी लगेगी। फिलहाल यह विस्तार प्रधानमंत्री राज्यमंत्री विस्तार योजना से कुछ नहीं है।

वहीं जातिवादी समीकरणों को ध्यान में रहकर भी नई केबिनेट की प्रशंसा भी की जा रही है।  नई कैबिनेट में 27 ओबीसी और 20 एससी-एसटी समुदाय से मंत्री है। जिसमे अनुसूचित जाति समुदाय से 12 नए मंत्री हैं तथा अनुसूचित जनजाति समुदाय से 8 सदस्य हैं। साथ ही मंत्री परिषद में अब महिला सदस्यों की संख्या 11 हो गई है। जिसे सोशल इंजीनियरीग का बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है।

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