महफूज हजम ने रचा इतिहास – ‘माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले पहले कश्मीरी’

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दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले 35 वर्षीय महफूज इलाही हाजम ने इतिहास रच दिया है। उन्होने 35 साल की उम्र में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कदम रख पहले कश्मीरी के तौर पर माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया है।हजम ने 1 जून, 2021 को सुबह 6.20 बजे माउंट एवरेस्ट को बड़ी कमायाबी के साथ फतह किया। उनकी एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसका दुनिया भर के कई पर्वतारोही सपना देखते हैं।

पहलगाम में जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (JIMWS) में प्रशिक्षक महफूज देश भर के छात्रों को पर्वतारोहण, लंबी पैदल यात्रा, स्कीइंग, व्हाइट वाटर राफ्टिंग सहित कई साहसिक खेल गतिविधियों में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करते आ रहे हैं।

25 अक्टूबर 1983 को कश्मीर में अपनी स्थापना के बाद, जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (JIMWS) ने पहली बार इस प्रतिष्ठित अभियान के लिए एक टीम का चयन किया। सात सदस्यों की इस टीम में चार JIMWS से और तीन सदस्यों नेहरु पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी से शामिल हुए।

टीम में महफूज की एंट्री अंतिम समय में हुई। क्योंकि JIMWS और NIM से एक-एक सदस्य को चुना जाना था। देश के दो प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों की टीम में अन्य सभी सदस्य सैनिक रहे। अभियान का नेतृत्व कर्नल आईएस थापा ने किया, जो एक प्रसिद्ध पर्वतारोही हैं, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट को दो बार फतह किया है।

टीम को 1 अप्रैल, 2021 को,  दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना हुई, जहां सभी उपकरणों और रसद की व्यवस्था करने कर टीम ने 4 अप्रैल को अपना खतरनाक अभियान शुरू किया। खराब मौसम का सामना करने के बावजूद टीम ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने चोटी पर पहुँचने के लिए 10 दिनों तक इंतजार किया। सात सदस्यों में से छह ने आखिरकार 1 जून, 2021 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर अपनी जगह बना ली। बिना किसी चोट के माउंट एवरेस्ट के सफल शिखर पर पहुंचने के बाद टीम बेस कैंप में लौट आई।

महफूज कुलगाम जिले के कुज्जर इलाके से हैं। उन्होने अपनी कामयाबी पर कहा कि “मैं बचपन से ही एडवेंचर में रहा हूं और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करना हर एडवेंचर लवर का सपना होता है। मैं उस टीम का हिस्सा बनकर खुद को भाग्यशाली मानता हूं जिसे जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग द्वारा प्रायोजित किया गया था।

उन्होने कहा, “हम पिछले कई सालों से अपने संस्थान में युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं लेकिन कश्मीरियों की ओर से कम प्रतिक्रिया मिली है।” JIM&WS प्रत्येक बैच में लगभग 100 प्रतिभागियों के साथ हर साल कई पाठ्यक्रम आयोजित करता है। अधिकांश छात्र देश के विभिन्न हिस्सों से हैं।

महफूज़ स्थानीय युवाओं को सलाह देते हैं कि वे किसी भी पर्वतारोहण अभियान में शामिल होने से पहले कम से कम एक बुनियादी पर्वतारोहण पाठ्यक्रम में भाग लें। उन्होने कहा, “यहां के स्थानीय लोग इस कोर्स को हल्के में लेते हैं। यह पहाड़ों और प्रकृति को हल्के में लेने जैसा है। हम छात्रों को लंबी पैदल यात्रा के दौरान कठिन परिस्थितियों से बचने के लिए प्रशिक्षित करते हैं। किसी को पता होना चाहिए कि अगर मौसम प्रतिकूल हो जाए या कोई घायल हो जाए तो क्या करना चाहिए।”

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला के अलावा माकपा नेता मुहम्मद यूसुफ तारिगामी ने महफूज और इकबाल खान को सफलता के लिए बधाई दी।

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